कामनवेल्थ की मशाल यानी बैटन को लेकर दौडऩे वालों के नामों को लेकर शिकायतों का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। जो नाम सामने आए हैं, उनमें कई नाम छोड़ दिए गए हैं। जो नाम छूट गए हैं उन नामों को जोडऩे में कोई परेशानी न होने की बात जहां राजधानी के वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेन्द्र डेकाटे कह रहे हैं, वहीं उनका कहना है कि अंतिम नाम तो राज्य स्तर पर बनी समिति को तय करने हैं, हम तो केवल संभावित नाम लिखकर भेजेंगे।
्दिल्ली में इस साल होने वाले कामनवेल्थ खेलों की बैटन भारत भ्रमण के दौरान ८ अगस्त को रायपुर आएगी। इस बैटन को लेकर दौडऩे वालों की जो सूची खेल विभाग ने तैयार की है, उस सूची को लेकर शिकायतों को सिलसिला प्रारंभ हो गया है। खेल विभाग ने प्रारंभिक तौर पर जो नाम तय किए हैं, उनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खिलाडिय़ों के साथ कुछ पुराने खिलाडिय़ों के नाम भी छोड़ दिए गए हैं। सूची में अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलक रूस्तम सारंग और उनके भाई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अजय दीप सारंग का नाम तो है पर इनके कोच और विक्रम पुरस्कार प्राप्त बुधराम सारंग का नाम छोड़ दिया गया है। इसी तरह से नेटबॉल की दो अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों प्रीति बंछोर और नेहा बजाज का तो नाम लिखा गया है, पर एक और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और राजीव पांडे पुरस्कार प्राप्त भावना खंडारे का नाम भी छोड़ दिया गया है। पहली बार मप्र और छत्तीसगढ़ के इतिहास में श्रीलंका में सब जूनियर फुटबॉल में खेलने वाली निकिता स्विसपन्ना और सुप्रिया कुकरेती का नाम भी नहीं है। राज्य के मैराथन विजेता और सैफ खेलों की मैराथन में शामिल अरविंद कुमार, कैनोइंग कयाकिंग के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नवीन साहू, ओलंपियन विल्सेंट लकड़ा, ओलंपियन मुक्केबाज दिवाकर नेताम के साथ बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई खिलाडिय़ों के नाम भी सूची में नहीं हैं। इसके अलावा और कई राष्ट्रीय खिलाडिय़ों के नाम सूची में न होने की बात सामने आ रही है। अब बैटन को भिलाई, दुर्ग और राजनांदगांव भी जाना है, ऐसे में वहां के खिलाडिय़ों को राजधानी की बैटन रिले में शामिल नहीं किया गया है। यहां तक तो ठीक है लेकिन बिलासपुर और बस्तर संभाग के खिलाडिय़ों को शामिल किए जाने की बात खेल संघों के पदाधिकारी कर रहे हैं।
खिलाडिय़ों के नाम सूची में छूटने के संबंध में जानकारी लेने जब राजधानी के वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेन्द्र डेकाटे से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि जो नाम सूची में हैं, वे नाम अंतिम नहीं है। सूची में और नाम जोडऩे पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन खेल संघों को लगता है कि उनके खिलाडिय़ों के नाम छूट गए हैं तो वे नाम जुड़वा सकते हैं। वैसे भी अंतिम नाम तय करना हमारे हाथ में नहीं है। हम संभावित नामों की सूची राज्य स्तरीय समिति के सामने रखेंगे, यही समिति कार्यक्रम को देखकर अंतिम नाम तय करेगी।
इधर बैटन के बारे में बताया जा रहा है यह बैटन भुवनेश्वर से ८ अगस्त को रायपुर पहुंचेगी। यहां पर ८ और ९ अगस्त को रहेगी। इन दो दिनों में बैटन को राजधानी का भ्रमण करवा जाएगा। पूर्व में जब बैटन को सड़क मार्ग से आना था तो ऐसे में भिलाई, दुर्ग और राजनांदगांव को इस बैटन से वंचित होना पड़ा था। लेकिन अब चूंकि बैटन को विमान से लाया जा रहा है तो ८ और ९ अगस्त को रायपुर में रहने के बाद इसे १० अगस्त को भिलाई, दुर्ग और राजनांदगांव भेजा जाएगा। राजनांदगांव से बैटन भिलाई आएगी और वहां पर रात्रि में कार्यक्रम होंगे। ११ अगस्त को बैटन भिलाई से सीधे माना विमानतल जाएगी जहां से उसे हैदराबाद के लिए रवाना किया जाएगा।
रविवार, 4 अप्रैल 2010
शनिवार, 3 अप्रैल 2010
क्रीड़ाश्री का तीसरा चरण आज से
पायका के लिए क्रीड़ाश्री को दिए जा रहे प्रशिक्षण शिविर के दूसरे चरण का समापन आज यहां हो गया। इस चरण में १०० क्रीड़ाश्री को निखार कर तैयार किया गया है। सभी क्रीड़ाश्री यहां से इस संकल्प के साथ लौटे हैं कि उनको अपने-अपने गांवों जाकर खिलाड़ी तैयार करने हैं। खिलाडिय़ों को तैयार करने की कला सिखकर ही ये यहां से लौटे हैं।
प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पायका योजना से जुड़े प्रदेश के ९८२ गांवों के क्रीड़ाश्री को यहां पर प्रशिक्षण देने का काम प्रारंभ किया है। दूसरे चरण में १०० क्रीड़ाश्री को निखारने में खेल के जानकार एक सप्ताह तक पसीना बहाया। इन दिनों में इन क्रीड़ाश्री को इतना तराश दिया गया है कि वे अब अपने-अपने गांव जाकर खिलाडिय़ों की नई पौध तैयार करने के काम में आसानी से जुट सकते हैं। क्रीड़ाश्री को छह दिनों में जो भी बताया गया उसको आजमाने के लिए एक क्वीज स्पर्धा का भी आयोजन किया गया, इनसे स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स के आउटडोर स्टेडियम में कबड्डी, वालीबॉल, फुटबॉल के मैदान बनवाए गए। हर मैदान में एक ९०अंश का कोण बनता है जो महत्वपूर्ण होता है। मैदान बनाने के बाद क्रीड़ाश्री को समूहों में बांटकर इनके बीच कबड्डी, फुटबॉल और वालीबॉल के मैच भी करवाए गए यह जानने के लिए कि इन्होंने इन खेलों के बारे में क्या सीखा है। खेलों से जुड़कर क्रीड़ाश्री खुश हैं कि चलो उनको भी अब खिलाड़ी तैयार करने के गुर मालूम हो गए हैं। सभी अब अपने-अपने गांव पहुंच कर खिलाडिय़ों को वो सब बताने के लिए बेकरार हैं जो इन्होंने यहां सीखा है।
प्रशिक्षण शिविर का तीसरा चरण तीन अपै्रल को पंजीयन से प्रांरभ होगा। चार अप्रैल से क्रीड़ाश्री को फिर से निखारने का काम किया जाएगा। इस चरण में २५० से ज्यादा क्रीड़ाश्री के शामिल होने की संभावना है। दूसरे चरण में महज १०० क्रीड़ाश्री आए थे। दो चरणो में ३५० क्रीड़ाश्री ही शामिल हो सके हैं, ऐेसे में बचे हुए दो चरणों में ६३२ क्रीड़ाश्री को प्रशिक्षण देना है।
प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पायका योजना से जुड़े प्रदेश के ९८२ गांवों के क्रीड़ाश्री को यहां पर प्रशिक्षण देने का काम प्रारंभ किया है। दूसरे चरण में १०० क्रीड़ाश्री को निखारने में खेल के जानकार एक सप्ताह तक पसीना बहाया। इन दिनों में इन क्रीड़ाश्री को इतना तराश दिया गया है कि वे अब अपने-अपने गांव जाकर खिलाडिय़ों की नई पौध तैयार करने के काम में आसानी से जुट सकते हैं। क्रीड़ाश्री को छह दिनों में जो भी बताया गया उसको आजमाने के लिए एक क्वीज स्पर्धा का भी आयोजन किया गया, इनसे स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स के आउटडोर स्टेडियम में कबड्डी, वालीबॉल, फुटबॉल के मैदान बनवाए गए। हर मैदान में एक ९०अंश का कोण बनता है जो महत्वपूर्ण होता है। मैदान बनाने के बाद क्रीड़ाश्री को समूहों में बांटकर इनके बीच कबड्डी, फुटबॉल और वालीबॉल के मैच भी करवाए गए यह जानने के लिए कि इन्होंने इन खेलों के बारे में क्या सीखा है। खेलों से जुड़कर क्रीड़ाश्री खुश हैं कि चलो उनको भी अब खिलाड़ी तैयार करने के गुर मालूम हो गए हैं। सभी अब अपने-अपने गांव पहुंच कर खिलाडिय़ों को वो सब बताने के लिए बेकरार हैं जो इन्होंने यहां सीखा है।
प्रशिक्षण शिविर का तीसरा चरण तीन अपै्रल को पंजीयन से प्रांरभ होगा। चार अप्रैल से क्रीड़ाश्री को फिर से निखारने का काम किया जाएगा। इस चरण में २५० से ज्यादा क्रीड़ाश्री के शामिल होने की संभावना है। दूसरे चरण में महज १०० क्रीड़ाश्री आए थे। दो चरणो में ३५० क्रीड़ाश्री ही शामिल हो सके हैं, ऐेसे में बचे हुए दो चरणों में ६३२ क्रीड़ाश्री को प्रशिक्षण देना है।
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010
क्रीड़ाश्री होंगे फिट तो खिलाड़ी होंगे हिट होंगे फिट तो खिलाड़ी होंगे हिट
प्रदेश 18 जिलों से आए 100 से ज्यादा क्रीड़ाश्री को यहां पर फिटनेस के गुर सिखाते हुए इनको खिलाड़ियों को हिट करने की कला सिखाई जा रही है। इस दूसरे चरण में परीक्षाओं के कारण कम क्रीड़ाश्री आ सके हैं। इनको तराशकर ठीक उसी तरह से इनके गांव भेजा जाएगा जिस तरह से पहले चरण के 250 क्रीड़ाश्री को भेजा गया है। क्रीड़ाश्री को प्रशिक्षण शिविर में प्रदेश सरकार की प्रतिभा खोज के साथ अयोजन कैसे करवाए जाए इसके बारे में जानकारी दी जा रही है।
प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पायका योजना से जुड़े प्रदेश के 982 क्रीड़ाश्री को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम यहां पर आयोजित किया है। इस कार्यक्रम के पहले चरण में 250 क्रीड़ाश्री को तराशने के बाद अब दूसरे चरण में 100 क्रीड़ाश्री को तराशने का काम चल रहा है। इन सभी को सुबह के सत्र में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के आउटडोर स्टेडियम में फिटनेस के गुर सिखाने का काम किया जा रहा है। यहां पर फिटनेस के गुर सिखाने का काम निंगराज रेड्डी, सरिता कुजूर, वरूण पांडे, संजय पाल, मुकेश गंभीर और अखिलेश आदित्य कर रहे हैं। सभी क्रीड़ाश्री जिस तरह से हर स्टेप को आसानी से कर रहे हैं उससे कहीं से नहीं लगता है कि इनके लिए यह काम नया है। वैसे भी ज्यादातर क्रीड़ाश्री खेलों से जुड़े हुए हैं।
मास्टर टेÑनर निंग राज रेड्डी कहते हैं कि क्रीड़ाश्री को इसलिए फिटनेस में मास्टर बनाने की तैयारी है क्योेंकि इनको ही आगे अपने-अपने गांव में जाकर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निखारने का काम करना है। अगर इसको ही यह मालूम नहीं होगा कि खिलाड़ियों को प्रारंभिक तौर पर कैसे तैयार करना है तो खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। सुबह के सत्र में जहां फिटनेस के गुर बताए गए, वहीं इनको प्रदेश सरकार की प्रतिभा खोज योजना से क्रीड़ाश्री को अवगत कराया गया। इस योजना में पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक खिलाड़ियों का विभिन्न तरीकों से चयन किया जाएगा। राज्य स्तर पर चुने जाने के बाद खिलाड़ियों को सरकार गोद लेकर उनको तैयार करने का काम करेगी। क्रीड़ाश्री को बताया कि उनको आयोजन करने के लिए क्या-क्या तैयारी करनी है। सभी क्रीड़ाश्री को अपने-अपने गांवों के साथ विकासखंड स्तर पर भी पांच खेलों के आयोजन करने है। आयोजन को सफल बनाने के गुर इनको बताए गए। शाम के सत्र में निंगराज रेड्डी ने क्रीड़ाश्री को बताया कि कैसे गांव के एक छोटे से मैदान में कई खेलों के मैदान बनाकर आयोजन किया जा सकता है। फुटबॉल की एनआईएस कोच सरिचा कुजूर ने सभी को फुटबॉल के बारे में विस्तार से जानकारी दी कि कैसे इस खेल का आयोजन करना है।
प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने पायका योजना से जुड़े प्रदेश के 982 क्रीड़ाश्री को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम यहां पर आयोजित किया है। इस कार्यक्रम के पहले चरण में 250 क्रीड़ाश्री को तराशने के बाद अब दूसरे चरण में 100 क्रीड़ाश्री को तराशने का काम चल रहा है। इन सभी को सुबह के सत्र में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के आउटडोर स्टेडियम में फिटनेस के गुर सिखाने का काम किया जा रहा है। यहां पर फिटनेस के गुर सिखाने का काम निंगराज रेड्डी, सरिता कुजूर, वरूण पांडे, संजय पाल, मुकेश गंभीर और अखिलेश आदित्य कर रहे हैं। सभी क्रीड़ाश्री जिस तरह से हर स्टेप को आसानी से कर रहे हैं उससे कहीं से नहीं लगता है कि इनके लिए यह काम नया है। वैसे भी ज्यादातर क्रीड़ाश्री खेलों से जुड़े हुए हैं।
मास्टर टेÑनर निंग राज रेड्डी कहते हैं कि क्रीड़ाश्री को इसलिए फिटनेस में मास्टर बनाने की तैयारी है क्योेंकि इनको ही आगे अपने-अपने गांव में जाकर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निखारने का काम करना है। अगर इसको ही यह मालूम नहीं होगा कि खिलाड़ियों को प्रारंभिक तौर पर कैसे तैयार करना है तो खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। सुबह के सत्र में जहां फिटनेस के गुर बताए गए, वहीं इनको प्रदेश सरकार की प्रतिभा खोज योजना से क्रीड़ाश्री को अवगत कराया गया। इस योजना में पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक खिलाड़ियों का विभिन्न तरीकों से चयन किया जाएगा। राज्य स्तर पर चुने जाने के बाद खिलाड़ियों को सरकार गोद लेकर उनको तैयार करने का काम करेगी। क्रीड़ाश्री को बताया कि उनको आयोजन करने के लिए क्या-क्या तैयारी करनी है। सभी क्रीड़ाश्री को अपने-अपने गांवों के साथ विकासखंड स्तर पर भी पांच खेलों के आयोजन करने है। आयोजन को सफल बनाने के गुर इनको बताए गए। शाम के सत्र में निंगराज रेड्डी ने क्रीड़ाश्री को बताया कि कैसे गांव के एक छोटे से मैदान में कई खेलों के मैदान बनाकर आयोजन किया जा सकता है। फुटबॉल की एनआईएस कोच सरिचा कुजूर ने सभी को फुटबॉल के बारे में विस्तार से जानकारी दी कि कैसे इस खेल का आयोजन करना है।
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