जूडो के अंतर्गत आने वाले इस नए खेल थांग-ता को तो अपने राज्य के हर गांव में छा जाना चाहिए। वास्तव में यह खेल देशी मार्शल आर्ट है और इसको खेलने की तरफ हर खिलाड़ी को ध्यान देना चाहिए। एक साल के समय में ही इस खेल ने जिस तरह से ८ जिलों में अपने पैरे पसारे हैं उससे यह तय है कि यह खेल बहुत जल्दी राज्य के हर गांव में जाना जाएगा। इस खेल को स्कूली खेलों में शामिल करवाने का प्रयास हमारी सरकार करेगी।
ये बातें यहां पर प्रदेश की खेलमंत्री लता उसेंडी ने पहली राज्य थांग-ता चैंपियनशिप के पुरस्कार वितरण में कही। उन्होंने कहा कि उनको बताया गया है कि यह खेल जूडो के अंतर्गत आने वाले २७ खेलों में से प्रमुख है। खेलमंत्री ने कहा कि हम लोग जब यहां पर दो खिलाडिय़ों के बीच मुकाबला देख रहे थे तो हमारी नजरें खिलाडिय़ों पर तो थीं, पर उससे ज्यादा नजरें निर्णायकों पर थीं, क्योंकि यह खेल संभवत: ऐसा पहला खेल है जिस खेल में दो खिलाडिय़ों के लिए सात मैदानी के साथ दो टेबल निर्णायक यानी कुल ९ जज होते हैं। उन्होंने कहा कि मुङो नहीं लगता है कि और किसी खेल में इतने ज्यादा निर्णायक दो खिलाडिय़ों के मुकाबले के लिए रहते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह खेल इतना अच्छा और तकीनीक रूप से मजबूत है कि इस खेल को आम लोगों तक पहुंचना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल संघ के साथ खिलाडिय़ों को भी यह चाहिए कि इस खेल को राज्य के हर गांव तक ले जाने का काम करें।
खेलमंत्री ने कहा कि हमारे सामने इस खेल को स्कूली खेलों में शामिल करवाने की मांग थांग-ता संघ के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने रखी है, हमारा प्रयास रहेगा कि यह खेल जरूर स्कूली खेलों में शामिल किया जाए।
भारतीय मार्शल आर्ट
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि अब तक मार्शल आर्ट के नाम से जितने भी खेल सामने आए हैं सभी के साथ जापान, चाइना, कोरिया सहित विदेशों के नाम ही जुड़े रहे हैं, लेकिन थांग-ता पहला ऐसा खेल है जो कि भारतीय मार्शल आर्ट है। यह खेल मणिपुर का पारंपरिक खेल है जो आज पूरे देश में खेला ज रहा है। उन्होंने कहा कि इस खेल को स्कूली खेलों में शामिल करने का सुङााव अच्छा है। उन्होंने खिलाडिय़ों से कहा कि वे यहां से जाने के बाद जरूर इस खेल के अपने जिलों के गांवों के साथ आस-पास के खिलाडिय़ों को सीखाने का काम करें। श्री सिंह ने खिलाडिय़ों को बताया कि छत्तीसगढ़ को जहां ३७वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली है, वहीं कामनवेल्थ की मशाल छत्तीसगढ़ आने वाली है। इसके बारे में भी खिलाडिय़ों से उन्होंने कहा कि बैटन रिले की जानकारी आप लोगों भी अपने अपने जिले में सभी को दें और इस ऐतिहासिक अवसर पर रायपुर के साथ राजनांदगांव, दुर्ग भिलाई में होने वाली बैटन रिले में शामिल होने का प्रयास करें।
स्कूलों में अनिवार्य हो थांग-ता
प्रदेश थांग-ता के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने कहा कि यह एक ओलंपिक खेल है जिसको स्कूली खेलों में शामिल करवाने का प्रयास प्रदेश सरकार को करना चाहिए। उन्होंने खेलमंत्री से कहा कि खेलमंत्री इस दिशा में पहल करें और इस खेल को स्कूली खेलों में शामिल करवाए ताकि ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी इस खेल से जुड़ सके। उन्होंने खेल विभाग की तारीफ करते हुए कहा कि पहले राज्य स्पर्धा के आयोजन के लिए विभाग से महज ५० हजार का अनुदान मिलता था लेकिन अब विभाग खुद स्पर्धा करवाने के साथ खिलाडिय़ों को नकद राशि देता है। इससे खिलाडिय़ों का उत्साह हर खेल में बढ़ा है।
पुरस्कार मिले-चेहरे खिले
कार्यक्रम के अंत में खेलमंत्री लता उसेंडी के साथ अन्य अतिथियों ने खिलाडिय़ों को नकद पुरस्कार राशि के साथ पदक बांटे। स्पर्धा के हर वर्ग में प्रथम स्थान पाने वाले खिलाडिय़ों को एक हजार, दूसरे स्थान पर रहने वालों को सात सौ पचास रुपए, तीसरे पर रहने वालों को पांच सौ रुपए की नकद राशि दी गई। स्पर्धा के दूसरे दिन सीनियर वर्ग के हुए मुकाबलों में ५२ किलो ग्राम में स्वर्ण रायपुर के दीनदयाल साहू को, रजत दुर्ग के देवा साहू को और कांस्य दुर्ग के चन्द्रेश लहरे को मिला। ५६ किलेग्राम में स्वर्ण रायपुर के शिवचरण साहू को, रजत दुर्ग के संतमणी कौशल को और कांस्य रायपुर के सुरजीत सिंह बघेला को मिला। ६० किलोग्राम में स्वर्ण रायपुर के रामनाराय जंघेल को, रजत दुर्ग के शंकर ठाकुर को और कांस्य बिलासपुर के कमलेश ध्रउव को मिला। सीनियर वर्ग की स्पर्धा का आयोजन राज्य संघ ने किया था जबकि सब जूनियर और जूनियर वर्ग का आयोजन खेल विभाग ने संघ के साथ मिलकर किया था।
थांग-ता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
थांग-ता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 4 जुलाई 2010
शनिवार, 3 जुलाई 2010
थांग-ता रायपुर के खिलाड़ी गए छा
पहली राज्य स्तरीय थांग-ता चैंपियनशिप में पहला दिन मेजबान रायपुर के नाम रहा। रायपुर के सब जूनियर, जूनियर और सीनियर खिलाडिय़ों ने जोरदार खेल दिखाते हुए एक दर्जन स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया। स्पर्धा में ६ जिलों के ११० खिलाड़ी मैदान में हैं।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने इस नए मार्शल आर्ट वाले खेल की पहली राज्य स्पर्धा का आयोजन छत्तीसगढ़ थांग-ता संघ के साथ मिलकर किया है। स्पर्धा में सब जूनियर के साथ जहां जूनियर वर्ग की स्पर्धा खेल विभाग करवा रहा है, वहीं सीनियरों की स्पर्धा का आयोजन संघ कर रहा है क्योंकि इस स्पर्धा के लिए खेल विभाग में बजट नहीं है। स्पर्धा के पहले दिन हुए मुकाबलों में रायपुर के साथ कांकेर के खिलाडिय़ों का दबदबा रहा। जहां स्वर्ण उड़ाने में रायपुर के खिलाड़ी सफल हुए वहीं ज्यादातर रजत पर कांकेर के खिलाडिय़ों ने हाथ साफ किया।
जूनियर बालिका वर्ग में ४४ किलो ग्राम स्वर्ण ममता दास (रायपुर), रजत वंदना सिंहा (कांकेर)। ४८ किलो- स्वर्ण राखी पर्ते (रायपुर), रजत ओमेश्वरी निषाद (बस्तर), कांस्य चंचल सिंहा (कांकेर)। ५२ किलो- स्वर्ण मनीषा गजभिये (रायपुर), रजत आरती सिंहा (कांकेर)। ५६ किलो स्वर्ण ज्वाला पर्ते (रायपुर), रजत चुनेश्वरी साहू (कांकेर)। ६० किलो स्वर्ण धनेश्वरी पांडे (रायपुर), रजत प्रतिभा तिग्गा (बस्तर)। सब जूनियर बालक २५ किलो स्वर्ण प्रखर शर्मा (रायपुर), रजत डिगेन्द्र साहू (दुर्ग), कांस्य संभल मालू (महासमुन्द)। ३३ किलो स्वर्ण लोमहर्ष जैन (कांकेर), रजत वेदव्यास यादव (कांकेर)। ३७ किलो स्वर्ण तुषार परगनिहा (रायपुर), रजत रोहित पांडे (बस्तर), कांस्य विनीत कौशिक (कांकेर)। बालिका वर्ग २५ किलो स्वर्ण एस. ज्योति (बस्तर), रजत प्रतिभा (रायपुर), कांस्य रविषा देवांगन (दुर्ग), २९ किलो स्वर्ण सौम्या साहू (कांकेर), रजत रीना जंघेल (रायपुर), कांस्य भावना देवांगन (बस्तर) ४१ किलो स्वर्ण जीज्ञाशा (बस्तर), रजत वैश्नवी काले (रायपुर), कांस्य शेफाली मंडावी (कांकेर), ४९ किलो स्वर्ण राधा कुमार , रजत नीलिमी रानी साना (बस्तर)। ३३ किलो स्वर्ण कामिनी साहू (रायपुर), रजत संती सिंहा (कांकेर), ३७ किलो स्वर्ण मेघा यादव, रजत ममता मंडावी (कांकेर), सीनियर महिला ५० किलो स्वर्ण दीपा वर्मा (कांकेर), रजत नीलम शर्मा (रायपुर), कांस्य राखी ताम्रकार (दुर्ग), ६२ किलो स्वर्ण ज्योतेश शर्मा (रायपुर), रजत गायत्री रजत (कांकेर),६६ किलो स्वर्ण गायत्री यादव (रायपुर) और रजत येगिता सिंहा (कांकेर) को मिला। आज के मुकाबलों में विजेता बने खिलाडिय़ों को कल सुबह ११ बजे खेल मंत्री लता उसेंडी ने पुरस्कार देकर सम्मानित करेगी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने इस नए मार्शल आर्ट वाले खेल की पहली राज्य स्पर्धा का आयोजन छत्तीसगढ़ थांग-ता संघ के साथ मिलकर किया है। स्पर्धा में सब जूनियर के साथ जहां जूनियर वर्ग की स्पर्धा खेल विभाग करवा रहा है, वहीं सीनियरों की स्पर्धा का आयोजन संघ कर रहा है क्योंकि इस स्पर्धा के लिए खेल विभाग में बजट नहीं है। स्पर्धा के पहले दिन हुए मुकाबलों में रायपुर के साथ कांकेर के खिलाडिय़ों का दबदबा रहा। जहां स्वर्ण उड़ाने में रायपुर के खिलाड़ी सफल हुए वहीं ज्यादातर रजत पर कांकेर के खिलाडिय़ों ने हाथ साफ किया।
जूनियर बालिका वर्ग में ४४ किलो ग्राम स्वर्ण ममता दास (रायपुर), रजत वंदना सिंहा (कांकेर)। ४८ किलो- स्वर्ण राखी पर्ते (रायपुर), रजत ओमेश्वरी निषाद (बस्तर), कांस्य चंचल सिंहा (कांकेर)। ५२ किलो- स्वर्ण मनीषा गजभिये (रायपुर), रजत आरती सिंहा (कांकेर)। ५६ किलो स्वर्ण ज्वाला पर्ते (रायपुर), रजत चुनेश्वरी साहू (कांकेर)। ६० किलो स्वर्ण धनेश्वरी पांडे (रायपुर), रजत प्रतिभा तिग्गा (बस्तर)। सब जूनियर बालक २५ किलो स्वर्ण प्रखर शर्मा (रायपुर), रजत डिगेन्द्र साहू (दुर्ग), कांस्य संभल मालू (महासमुन्द)। ३३ किलो स्वर्ण लोमहर्ष जैन (कांकेर), रजत वेदव्यास यादव (कांकेर)। ३७ किलो स्वर्ण तुषार परगनिहा (रायपुर), रजत रोहित पांडे (बस्तर), कांस्य विनीत कौशिक (कांकेर)। बालिका वर्ग २५ किलो स्वर्ण एस. ज्योति (बस्तर), रजत प्रतिभा (रायपुर), कांस्य रविषा देवांगन (दुर्ग), २९ किलो स्वर्ण सौम्या साहू (कांकेर), रजत रीना जंघेल (रायपुर), कांस्य भावना देवांगन (बस्तर) ४१ किलो स्वर्ण जीज्ञाशा (बस्तर), रजत वैश्नवी काले (रायपुर), कांस्य शेफाली मंडावी (कांकेर), ४९ किलो स्वर्ण राधा कुमार , रजत नीलिमी रानी साना (बस्तर)। ३३ किलो स्वर्ण कामिनी साहू (रायपुर), रजत संती सिंहा (कांकेर), ३७ किलो स्वर्ण मेघा यादव, रजत ममता मंडावी (कांकेर), सीनियर महिला ५० किलो स्वर्ण दीपा वर्मा (कांकेर), रजत नीलम शर्मा (रायपुर), कांस्य राखी ताम्रकार (दुर्ग), ६२ किलो स्वर्ण ज्योतेश शर्मा (रायपुर), रजत गायत्री रजत (कांकेर),६६ किलो स्वर्ण गायत्री यादव (रायपुर) और रजत येगिता सिंहा (कांकेर) को मिला। आज के मुकाबलों में विजेता बने खिलाडिय़ों को कल सुबह ११ बजे खेल मंत्री लता उसेंडी ने पुरस्कार देकर सम्मानित करेगी।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)