शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

भिलाई को दोहरा खिताब

राज्य सब जूनियर बास्केटबॉल में भिलाई ने बालकों के साथ बालिका वर्ग का खिताब जीत लिया। यह 10वां अवसर है जब खिताब पर भिलाई के कब्जा किया है।

पहले फाइनल में बालिका टीम ने भिलाई इस्पात संयंत्र की टीम ने दुर्ग जिला को 77-58 अंकों से पराजित किया। भिलाई की ओर से रागिनी झा ने 13, पी दिव्या ने 12, रिया वर्मा ने 14, रमी वानखेड़े ने 10, मनीषा गुर्जर ने 08 एवं वन्दना आर्य ने 08 अंक बनाये। जबकि दुर्ग की ओर से विमला इक्का ने 12, मनीषा ने 10, महिमा भारद्धाज ने 12 अंक बनाये। बालक वर्ग के फाइनल में भिलाई इस्पात संयंत्र ने राजनांदगांव को 52-38 अंकों से पराजित कर खिताब जीता। विजेता टीम के लिए पी राजेश ने 11, ए गणेश ने 10, अमित यादव ने 04 , कन्हैया ने 08 अंक बनाए।

अंतर कॉलेज फुटबॉल की तैयारी जोरों पर

कॉलेजों में खेलों की शुरुआत फुटबॉल से होने जा रही है। रायपुर सेक्टर के कॉलेजों के बीच होने वाली स्पर्धा की विप्र कॉलेज में जोरदार तैयारी चल रही है। मैदान बनाने का काम गुरुवार से प्रारंभ किया गया।

मेजबान विप्र कॉलेज के प्राचार्य मेघेष तिवारी ने बताया कि हमारा कॉलेज ही लगातार फुटबॉल की मेजबानी ले रहा है। कॉलेज के पास फुटबॉल का एक बड़ा मैदान है। मैदान को ठीक करने का काम प्रारंभ कर दिया गया है। बारिश की वजह से तैयारियों में बाधा आई है जिसके कारण अब स्पर्धा का आयोजन 23 के स्थान पर 25 अगस्त से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले साल हमारे कॉलेज ने खिताब जीता था। स्पर्धा में विप्र कॉलेज के साथ छत्तीसगढ़, दुर्गा, पैलोटी, प्रगति, मंहत अग्रसेन कॉलेज की टीमों से खेलने की मंजूरी दी है। श्री तिवारी ने बताया कि कॉलेजों में फुटबॉल को लोकप्रिय करने के मकसद से ही विजेता टीमों के लिए ट्रॉफी का इंजताम हमारा कॉलेज करता है, वैसे विश्व विद्यालय की तरफ से किसी भी तरह से इनाम नहीं दिया जाता है।

सेवन-ए-साइड पर चर्चा करेंगे

श्री तिवारी ने बताया कि ज्यादातर कॉलेजों में मैदानों की कमी के कारण ही टीमें नहीं बन पाती हैं। अगली बार जब विश्व विद्यालय में क्रीड़ा समिति की बैठक होगी तो उसमें यह बात रखी जाएगी, कि क्यों न कॉलेजों में फुटबॉल को लोकप्रिय करने के लिए सेवन-ए-साइड स्पर्धा कराई जाए। किसी भी कॉलेज के लिए सात खिलाड़ी जुटाना आसान होगा।

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

छोटे से काम में अटका सवा दो करोड़ का हास्टल

साइंस कॉलेज के मैदान में सवा दो करोड़ की लागत से बने 100 बिस्तरों वाले हास्टल का उद्घाटन छोटे-मोटे कामों के कारण नहीं हो रहा है। खेलमंत्री लता उसेंडी ने इन कामों के लिए अधोसंरचना मद से राशि देने की बात तो कही है, पर इसे अभी तक खेल मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल पाई है। इधर विभाग से हास्टल की बाऊंड्री के लिए एक 22 लाख का भी प्रस्ताव बनाकर भेजा है।

खेल विभाग साइंस कॉलेज के मैदान में मिली 34 एकड़ जमीन को खेल हब के रुप में विकसित करने में लगा है। यहां पर तीन खेलों हॉकी, तीरंदाजी और स्क्वैश की अकादमी बनाने की तैयारी है। इन अकादमियों में रखे जाने वाले खिलाड़ियों के लिए विभाग के पिछले साल ही यहां पर दो करोड़ 31 लाख की लागत से एक हास्टल का निर्माण प्रारंभ किया था। लोक निर्माण विभाग ने हास्टल का काम तो पूरा कर दिया है, लेकिन हास्टल में बिजली के काम के साथ इंटीरियल का काम शेष है। इंटीरियल के काम पर 6 लाख और बिजली पर 13 लाख का खर्च आना है। इस खर्च के लिए जब वित्त विभाग ने हाथ खड़े कर दिए तो एक प्रस्ताव बनाकर खेलमंत्री लता उसेंडी के सामने रखा गया। खेलमंत्री ने इस प्रस्ताव पर मौखिक मंजूरी तो पिछले माह दे दी थी, पर अब तक लिखित मंजूरी नहीं मिल पाई है जिसके कारण बचा काम प्रारंभ नहीं हो रहा है। खेल संचालक जीपी सिंह ने बताया कि विभागीय प्रक्रिया चल रही है और उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी और बचा काम प्रारंभ करके हास्टल का उद्घाटन कर लिया जाएगा।

बाऊंड्री के लिए 22 लाख का प्रस्ताव

खेल संचालक ने बताया कि हास्टल को सुरिक्षत रखने के लिए बाऊंडी बनाने का एक प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर करीब 22 लाख का खर्च आएगा। उन्होंने बताया कि हास्टल के पास ही हॉकी, वालीबॉल और तीरंदाजी के मैदान है। यहां पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों से जानकारी मिली है कि सुबह और शाम के समय लोग मैदान को ओपन शौचालय के रुप में प्रयोग करने लगते हैं जिससे परेशानी होती है, ऐसे में हास्टल के लिए बाऊंड्री जरूरी है जिसका प्रस्ताव भेजा गया है।

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