बुधवार, 21 अप्रैल 2010

क्रीड़ाश्री का एक चरण और होगा

प्रदेश के खेल विभाग द्वारा राज्य के ९८२ क्रीड़ाश्री के लिए लगाए गए प्रशिक्षण शिविर के चार चरणों के बाद भी ३२५ क्रीड़ाश्री बच गए हैं। अब इनको प्रशिक्षण देने के लिए एक चरण का आयोजन औैर किया जाएगा। इसके पहले जिन गांवों से क्रीड़ाश्री नहीं आए हैं उसकी वजह जानने के बाद जहां पर क्रीड़ाश्री काम करने के इच्छुक नहीं हैं, वहां पर दूसरे क्रीड़ाश्री रखे जाएंगे।
केन्द्र सरकार की पंचायत एवं युवा ग्रामीण अभियान योजना यानी पायका के तहत पहले साल में प्रदेश के ९८२ गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में खेलों के विकास के लिए क्रीड़ाश्री की नियुक्ति की गई है। प्रदेश के सभी १८ जिलों के १० प्रतिशत चयनित गांवों में क्रीड़ाश्री की नियुक्ति करने के बाद इन सभी को प्रशिक्षण देने के लिए यहां पर एक माह का एक कार्यक्रम बनाया गया और क्रीड़ाश्री को चार चरणों में बांट कर प्रशिक्षण दिया गया। यह कार्यक्रम राजधानी रायपुर में २० मार्च से १६ अप्रैल तक चला। हर चरण में २५० के आस-पास क्रीड़ाश्री रखने की योजना खेल विभाग ने बनाई थी। पहले चरण में तो २५४ क्रीड़ाश्री आए, लेकिन अगले चरण से सारा गणित फेल हो गया। दूसरे चरण में महज ११८ क्रीड़ाश्री आए। ऐसे में कहा गया कि अगले दो चरणों में बाकी को शामिल कर लिया जाएगा। तीसरे चरण में भी जब १२७ ही क्रीड़ाश्री शामिल हुए तो कहा गया कि अंतिम चरण में सभी शामिल होंगे। अंतिम चरण में बमुश्किल यह आंकड़ा १६८ तक पहुंचा। कुल मिलाकर चार चरणों में ६६७ क्रीड़ाश्री ही तराशे जा सके। बाकी के ३२५ क्रीड़ाश्री क्यों नहीं आए पाए इसका कारण जानने पर मालूम हुआ कि कई तो अपने व्यक्तिगत कारणों से नहीं आ सके तो कई को इसमें रूचि नहीं है। ऐसे में अब खेल विभाग ने तय किया है कि सबसे पहले जिन गांवों के क्रीड़ाश्री नहीं आ पाए हैं उसका सही कारण जाना जाएगा। सही कारण होने पर उन क्रीड़ाश्री की नियुक्ति कायम रहेगी, कारण सही न होने पर या फिर जो क्रीड़ाश्री काम करने के इच्छुक नहीं हैं, उनके स्थान पर नई नियुक्ति की जाएगी। जब यह लगेगा कि अब बचे सभी क्रीड़ाश्री आ सकते हैं तो ऐसे में एक और चरण का आयोजन करके उनको प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस बारे में उपसंचालक ओपी शर्मा जो कि पायका के राज्य प्रभारी हैं, कहते हैं कि सभी जिलों में क्रीड़ाश्री की नियुक्ति उनकी मर्जी से की गई थी, हो सकता है कोई किसी कारणवश काम करना न चाहते हों, ऐसे में उनके स्थान पर दूसरी नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि वैसे भी यह एक तरह से जनसेवा का काम है। इसमें मानदेय पांच सौ रुपए ही हैं। संभव है कि किसी को मानदेय के कारण परेशानी हो रही हो, ऐसे में ऐसे युवाओं की तलाश की जाएगी जो राज्य और देश के साथ खेलों के लिए कुछ करना चाहते हैं। पूछने पर श्री शर्मा ने बताया कि अंतिम चरण का आयोजन भी संभवत: राजधानी में किया जाएगा। यह आयोजन अगले माह करने योजना है।

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

आभार जानकारी का.

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