सोमवार, 15 मार्च 2010

पायका में होगा छत्तीसगढ़ नंबर वन



पंचायत युवा क्रीड़ा खेल अभियान यानी पायका में भी छत्तीसगढ़ नंबर वन होगा इस बात के संकेत यहां पर राजधानी रायपुर में जिले के क्रीड़ाश्री की कार्यशाला में सभी ने दिए हैं। खेल संचालक जीपी सिंह, उपसंचालक ओपी शर्मा, जिले के खेल प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार, वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेन्द्र डेकाटे के साथ रायपुर के सभी क्रीड़ाश्री ने जहां रायपुर को नंबर बनाने का संकल्प लिया है, वहीं छत्तीसगढ़ को भी पायका में नंबर बन बनाने की बात कही है।

केन्द्र सरकार की पायका योजना को लागू करने में वास्तव में छत्तीसगढ़ इस समय नंबर वन पर चल रहा है। इसी के साथ रायपुर जिला देश का ऐसा पहला जिला भी बन गया है जिसने पहले चरण के सभी क्रीड़ाश्री को एक स्थान पर एकत्रित करने का काम किया है। पहले चरण के १२३ गांवों में क्रीड़ाश्री बनाकर वहां पर पायका के सेंटर भी बना दिए गए हैं। इन सभी सेंटरों के लिए आज सभी को सामान भी दिए गए। ये सामान अतिथियों ने दिए।

देश के लिए कुछ करने के जज्बे से काम करें

पायका की पहली बैठक में खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं है कि क्रीड़ाश्री को केन्द्र सरकार द्वारा दिए जाने वाला ५०० रुपए का मानदेय बहुत कम है। हमने केन्द्र सरकार के खेल मंत्रालय के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। हमारे साथ और कई राज्यों ने यह मुद्दा उठाया है। हमने मानदेय दो हजार करने की मांग रखी थी, हम जानते हैं कि यह इतना हो पाना तो संभव नहीं है, पर एक हजार होने की जरूर संभावना है। उन्होंने कहा कि मानदेय को अगर छोड़ दिया जाए तो आपको गांवों में जो प्रतिष्ठा मिलेगी उसकी कोई कीमत नहीं लगा सकता है। इसी के साथ देश प्रेम के जज्बे के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आप में से ज्यादातर लोग खेलों से जुड़े हैं और खिलाडिय़ों का काम ही होता है देश की सेवा करने का।

खेल का माहौल बनाना मकसद है

खेल संचालक ने कहा कि पायका का मकसद गांवों में खेलों का माहौल बनाना है। उन्होंने कहा कि आपको यह जानकर खुशी होगी कि केन्द्र सरकार की पायका योजना से काफी पहले राज्य की खेलनीति में खेलों का विकास ग्रामीण स्तर से करने की बात है। छत्तीसगढ़ की खेल नीति को देखकर केन्द्र सरकार ने योजना बनाई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

शहरी खिलाडिय़ों को न रखें

खेल संचालक ने क्रीड़ाश्री को साफ शब्दों में कहा कि सभी को इस बात का बहुत ज्यादा ध्यान रखना है पायका योजना शुद्ध रूप से गांव के खिलाडिय़ों के लिए है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप लोग इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि किसी भी स्पर्धा में शहरी खिलाड़ी फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे न खेल पाएं। इसी के साथ ओवरएज की भी शिकायतें बहुत आती हैं, इस पर भी गंभीरता से ध्यान देना है। गांव स्तर पर तो हर वर्ग के खिलाडिय़ों को खेलने की पात्रता है, लेकिन इसके बाद ब्लाक स्तर पर १८ साल से ज्यादा उम्र के खिलाडिय़ों का खेलना प्रतिबंधित है।

क्रीड़ाश्री बनेंगे पुलिस मित्र

जिले के खेल प्रभारी पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि उनकी योजना अब हर गांव के क्रीड़ाश्री को पुलिस मित्र बनाने की है, ताकि आप लोग किसी भी बड़ी घटना को रोकने में पुलिस के मददगार साबित हो सके। उन्होंने कहा कि पायका योजना में हमारा जिले देश में नंबर होगा वह इस बात से ही साबित होता है कि देश में सबसे पहले रायपुर जिले में ही
क्रीड़ाश्री की नियुक्ति की गई है।

असली प्रतिभाएं गांवों में हैं

उपसंचालक और पायका के राज्य तकनीकी संचालक ओपी शर्मा ने कहा कि इसमें दो कोई दो मत नहीं है कि खेल की असली प्रतिभाएं गांवों में रहती हैं। शहरों में खिलाड़ी हैं, उनके पास सुविधाएं भी ज्यादा हैं, लेकिन इनके पास खेलने के लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा कि आपको अब गांवों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का मौका मिला है तो इस मौके का फायदा उठाए और अपने गांव का नाम खेल जगत में दर्ज करवाने आगे आएं।

पायका ने दिलाई आस्टे्रलिया की याद

एनआईएस कोच गजेन्द्र पांडे ने कहा कि भारत सरकार की पायका योजना ने उनको आस्ट्रेलिया की याद दिला दी। उन्होंने बताया कि २००३ में पटियाला में जब भारत और आस्टेलिया के खिलाडिय़ों की एक कार्यशाला हुई थी तो वहां पर आस्ट्रेलिया के खेल मंत्री आए थे, उन्होंने बताया था कि उनके मंत्रालय द्वारा हर गांव में एक-एक आदमी को नियुक्ति किया गया है जो खेल प्रतिभाओं को पहचान कर आगे भेजने का काम करते हैं। इन आदमियों को कोई पैसा नहीं दिया जाता है, ये सब देश सेवा के भाव से ऐसा काम करते हैं। उन्होंने कहा कि आज आस्ट्रेलिया खेलों में कहां है बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनको यह बात इसलिए भी याद आ गई क्योंकि आस्ट्र्रेलिया ने विश्व कप हॉकी का खिताब जीता है।

गांवों में मैदानों की कमी

कार्यशाला में आए १२३ क्रीड़ाश्री में से ज्यादातर एक स्वर में कहा कि गांवो में खेल मैदानों की कमी है। इन्होंने यह भी बताया कई गांवों में पंचायत भवन और स्कूलों में कमरों की कमी है ऐसे में वहां पर जिम लगाने में परेशानी हो सकती है। एक क्रीड़ाश्री ने सुङााव दिया कि गांवों में भी शहरों की तरह ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएं क्योंकि गांवों में लोग कबड्डी और खो-खो के अलावा दूसरे खेलों से अंजान है। कार्यशाला में जो क्रीड़ाश्री शामिल हुए उनमें ज्यादातर शिक्षा कर्मी, बीपीएड और एमपीएड के पूर्व विद्यार्थी, हैंडमास्टर, सरपंच भी शामिल हैं। कार्यशाला में वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेन्द्र डेकाटे ने बताया कि सभी क्रीड़ाश्री को पायका सेंटर चलाने के लिए १४ तरह के सामान दिए जा रहे हैं।

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