रविवार, 3 जनवरी 2010

स्कूलों में खेलों पर ध्यान देना जरूरी

पूर्व अंतरराष्ट्रीय टेटे खिलाड़ी कमलेश मेहता से बातचीत

भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस खिलाड़ी अर्जुन पुरस्कार प्राप्त कमलेश मेहता का कहना है कि देश में स्कूली स्तर पर खेलों में ध्यान जरूरी है। आज टेबल टेनिस ही नहीं हर खेल में हमारी नींव कमजोर है। स्कूल स्तर को ही खेलों की नींव माना जाता है, अगर नींव कमजोर है तो हम यह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ अच्छा कर सकते हैं।


यहां पर चल रही राष्ट्रीय यूथ और जूनियर टेबल टेनिस में महाराष्ट्र टीम से खेल रहे अपने खिलाडिय़ों का खेल देखने आए इस खिलाड़ी ने कुछ खेल पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि आज टेबल टेनिस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल पा रही है तो इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि निचले स्तर पर यानी की स्कूलों में खेल पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जब स्कूली खिलाडिय़ों को शुरू से निखारने का काम होगा तो ही ये खिलाड़ी आगे जाकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जरूर कमाल करेंगे। उन्होंने कहा कि इसी के साथ यह भी जरूरी है कि अपने देश के प्रशिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिलाया जाए। जब प्रशिक्षकों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का ज्ञान होगा तो वे खिलाडिय़ों को अच्छी तरह से तैयार करने में सफल होंगे।


भारतीय जूनियर टीम के चयनकर्ता और ७ बार विश्व कप के साथ ८ बार एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम से खेलने वाले इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि खिलाडिय़ों को निखारने में प्रशिक्षकों की भूमिका तो अहम होती है, पर पालकों के साथ स्कूल के प्रबंधन को भी खिलडिय़ों की तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पालकों के प्रोत्साहन के बिना किसी भी खिलाड़ी का आगे बढऩा संभव नहीं होता है।


एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय चैंपियनशिप का होना अच्छी बात है, एक नए राज्य ने इतना अच्छा आयोजन किया है इसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने पूछने पर कहा कि छत्तीसगढ़ ही क्या किसी भी राज्य के खिलाडिय़ों का खेल निखारने के लिए यह जरूरी है उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलाया जाए। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे ८ बार १९८१ से ९४ के बीच राष्ट्रीय चैंपियन रहे हैं। उनके खाते में भारत के ऐसे पहले खिलाड़ी होने का सम्मान है जिनकी एशियन, कामनवेल्थ के साथ विश्व में सबसे अच्छी रैंकिंग रही है। वे १९९८ में भारतीय टीम के कोच भी रहे हैं। इस समय मुंबई में उनकी एक अकादमी चल रही है जहां पर वे खिलाडिय़ों को निखारने का काम करते हैं। १९९१ से सैफ खेलों में पदक जीतने वाले भारतीय टीम के भी वे सदस्य थे। इस समय यूथ वर्ग के साथ जूनियर वर्ग में भी महाराष्ट्र के खिलाडिय़ों का दबदबा है।

3 टिप्‍पणियां:

Gautam Sehgal ने कहा…

जी आपने बिलकुल ठीक कहा मैं इस चीज़ से गुज़र चूका हूँ |
अपने स्कूल में मुझे भी खेल न होने की वजह से बहुत नुकसान हुआ |

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके विचारो से सहमत हूँ . खेल कूद भी शारीरिक शिक्षा का अनिवार्य अंग होना चाहिए .... .... . नववर्ष की शुभकामना

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

विचारणीय पोस्ट लिखी है।..आधिकतर.स्कूलो मे इस खेलो की ओर बिल्कुल ध्यान नही दिया जाता....यदि किसी स्कूल मे खेल का सामान मौजूद भी होता है तो स्कूल प्रशासन उस का इस्तमाल ही नही करते..ऐसे मे देश का खेलो मे भविष्य क्या हो सकता है....
आप ने बहुत बढ़िया पोस्ट लिखी ।धन्यवाद।

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