शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

बचपन की याद दिलाते हैं लोक खेल


छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को जिंदा रखने के लिए यह जरूरी है कि इन खेलों के ऐसे आयोजन किए जाए जैसा आयोजन यहां पर खेल विभाग ने छत्तीसगढ़ लोक खेल एसोसिएशन के साथ मिलकर किया है। हमारे लोक खेल हमें बचपन की याद दिलाते हैं। शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने अपने बचपन में इन खेलों का आनंद नहीं लिया होगा। लेकिन अब ये खेल आधुनिक खेलों के कारण लुप्त हो रहे हैं। पारंपरिक खेलों को जिंदा रखना भी हमारा दात्यिव है।


ये बातें यहां पर खेल मंडई का सप्रे स्कूल में उद्घाटन करते हुए खेल मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने कहीं। उन्होंने कहा कि मैं यहां पर अतिथियों के साथ यही बात कर रही थी कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल गिल्ली-डंडा, पुधव पूक, गेगें, पिट्टूल, तुवे लंगरची, फुगड़ी और भिर्री ऐसे खेल हैं जिन खेलों को सभी ने बचपन में खेला है। अब ये खेल अपने प्रदेश में कहीं देखने को नहीं मिलते हैं। इन लुप्त होते खेलों को जिंदा रखने का काम छत्तीसगढ़ लोक खेल संघ कर रहा है। इस संघ के अनुरोध पर ही हमारे विभाग ने पहली बार इन खेलों का राज्य स्तर पर आयोजन करने का फैसला राजधानी रायपुर में किया है ताकि यहां के लोग भी इन खेलों के बारे में जान सके। इन पारंपरिक खेलों का आकर्षण किसी भी मायने में आधुनिक खेलों से कम नहीं है। हमारे ये खेल छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं। इन खेलों को जिंदा रखना हमारा कत्र्तव्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन ज्यादा से ज्यादा होने चाहिए।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संसदीय सचिव विजय बघेल ने कहा कि विदेशी खेलों के सामने हम अपने मिट्टी के खेलों को भूल रहे थे, पर खेल विभाग ने इन खेलों का आयोजन करके इनकी याद ताजा कर दी है। खेल ंसंचालक जीपी सिंह ने कहा कि ग्रामीण अंचल में आज भी छत्तीसगढ़ के ये पारंपरिक खेल खेले जाते हैं। ग्रामीण खिलाडिय़ों को फुटबॉल और वालीबॉल के साथ महंगे खेलों को खेलने का मौका नहीं मिलता है, ऐसे में ये खिलाड़ी अपने पारंपरिक खेलों से ही अपना मन बहला लेते हैं। ये ऐसे खेल हैं जिनको बिना खर्च के खेला जा सकता है। इन खेलों को हर वर्ग के और हर उम्र के लोग खेल सकते हैं। इस अवसर पर प्रदेश वालीबॉल संघ के महासचिव मो। अकरम खान, उपसंचालक ओपी शर्मा, राज्य खेल अधिकारी अजीत कुमार टोपो, लोक खेल संघ के चन्द्रशेखर चकौर, बाल कल्याण परिषद के मोहन चोपड़ा उपस्थित थे।


अतिथि खेलने का मोह नहीं छोड़ पाए

स्पर्धा के उद्घाटन की घोषणा के बाद खेल मंत्री लता उसेंडी के साथ सभी अतिथि मैदान में आ गए और पारंपरिक खेलों में हाथ आजमाने लगे। सबसे पहले खेल मंत्री लता उसेंडी ने गिल्ली-डंडा में हाथ आजमाए। खेल मंत्री ने गिल्ली-डंडा खेल कर दिखाया कि उनको भी इस खेल के बारे में जानकरी है। खेल मंत्री को गेढ़ी भी दी गई, पर वह इसकी सवारी नहींं कर सकीं। इधर संसदीय सचिव विजय बघेल ने भी गिल्ली-डंडे में अपने जौहरे दिखाएं। उन्होंने जोरदार शाट लगाकर बताया कि वे कैसे बचपन में इस खेल को खेलते थे। उन्होंने गेढ़ी की सवारी भी की और इससे फुटबॉल भी खेला। खेल संचालक जीपी सिंह ने गिल्ली-डंडा खेलने के लिए जब मोर्चा संभाला तो काफी प्रयास के बाद उनका डंडा गिल्ली के संपर्क में आया और उन्होंने एक शाट लगाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने भी गेढ़ी की सवारी करने का प्रयास किया, पर सफल नहीं हुए। पार्षद सुभाष तिवारी ने भी गिल्ली-डंडा खेला साथ ही गेढ़ी की सवारी की।

फुगड़ी में दुर्ग का दबदबा


स्पर्धा के पहले दिए हुए मुकाबलों में फुगड़ी में दुर्ग का दबदबा रहा। इस खेल में चार जिलों के खिलाडिय़ों ने हाथ आजमाएं जिसमें दुर्ग की खिलाड़ी पहले और दूसरे स्थान पर रही। पहला स्थान कल्पना चन्द्रवंशी को तो दूसरा स्थान माधुरी बाग को मिला। तीसरा स्थान रायपुर की पूजा धीवर को मिला। तुवे लंगरची में रायपुर और धमतरी की टीमें फाइनल में पहुंची हैं।


८ जिलों के खिलाड़ी मैदान में

स्पर्धा के आयोजन का जिम्मा संभाल रहे खेल विभाग के राज्य खेल अधिकारी अजीत कुमार टोपो ने बताया कि स्पर्धा में ८ जिलों के करीब २०० खिलाड़ी कई खेलों में अपने जौहर दिखाने आए हैं। इन खिलाडिय़ों के रहने और खाने का खर्च खेल विभाग कर रहा है। स्पर्धा के दूसरे दिन फाइनल मुकाबलों के बाद दोपहर तीन बजे होने वाले पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्यअतिथि खेल संचालक जीपी सिंह होंगे।

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

मड़ई खेल एक बहुत अच्छा प्रयास समझ में आ रहा है.

अफ़लातून ने कहा…

लोक खेलों के बारे में पढ़कर अच्छा लगा । आप से समय समय पर इनकी बाबत सूचनायें मिलती रहेंगी,उम्मीद है। कूच ऐसे लोक खेल भी होंगे जिनमें हार-जीत न होगी ।

निर्मला कपिला ने कहा…

मुझे लगता है अपनी विरासत सम्भालने के लिये छतीसगढ सब से आगे है । लोक खेलों को सम्भालने का प्रयास सराहनीय है धन्यवाद्

छत्तीसगढ़ पोस्ट ने कहा…

लोक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में ऐसी खबरें बड़ी भूमिका अदा करेंगी...खेलगढ़ को बधाई...ढेरों...

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